गोल्ड में कैसे करें ट्रेडिंग ?

कमोडिटी एक्सचेंज में ट्रेडर्स के लिए गोल्ड की ट्रेडिंग सुनहरे लाभ का मौका होती है, लेकिन इसकी ट्रेडिंग में दूसरे अन्य ट्रेडिंग विकल्पों से ज्यादा सतर्कता भी जरूरी है.

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गोल्ड में कैसे करें ट्रेडिंग

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सोना (गोल्ड)

हजारों सालों से सोना आर्थिक जगत में खास पायदान पर रहा है. बिजनेस और डेंटिस्ट्री सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलरी में सोने की मांग तेज है. लेकिन ये ही वो कारण नहीं है जो सोने की कीमत को उजला बनाते हों, दरअसल सिविलाइजेशन की शुरुआत से ही सोने को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का सूचक माना जाता रहा है. सोने का खनन और उसका शोधन कार्य काफी खर्चीली प्रक्रिया है. धरती पर मौजूद बहुमूल्य 10 खनिज तत्वों की सूची में सोना तीसरे स्थान पर है. अपनी खासियतों की वजह से सोना सबसे प्रचलित धातु होने के साथ ही निवेश का भी खास विकल्प है.

क्यों कीमती है सोना

किसी अन्य धातु को इतिहास में इतना अहम स्थान नहीं मिला जो स्थान सोना रखता है. हजारों सालों से सोना आभूषणों का सरताज बना हुआ है. पुराने समय में जहां इसे सजावट और गहनों के साथ ही आयुर्वेदिक दवा के रूप में उपयोग किया जाता था. वहीं आज के तकनीकि दौर में उपकरणों के निर्माण में भी सोने का उपयोग किया जाने लगा है. FMI और WB ने सोने के मौद्रिक उपयोग की सलाह दी है. जिसमें गारंटी बिल में सोने के बदले निश्चित राशि के भुगतान की गारंटी दी जाती है.

गोल्ड प्रोसेस

सोने के खनन के बाद रिफाइनरीज़ में सोने का शुद्धीकरण होता है. यहां इसे बार्स का रूप देकरबेच दिया जाता है. इसे खरीदने के बाद खरीदार गोल्ड-बार को क्वॉइन, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में तब्दील करते हैं या फिर वे गोल्ड बार को स्टोर कर उसे एक विनियोग के तौर पर उपयोग करते हैं. इसकी आपूर्ति की तरह ही सोने की मांग भी अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ और ट्रेडर्स में अंतर राष्ट्रीय स्तर देखी जाती है. तेजी से विकसित हो रही एशियाई अर्थव्यवस्थाओं भारत और चीन में सोने की मांग में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है.

कहां मिलता है

सोने के भंडार न केवल धरती बल्कि समुद्र में भी मौजूद हैं. अंटार्कटिका को छोड़कर सभी कॉन्टीनेंट्स में सोने का खनन किया जा रहा है. विश्लेषकों का अनुमान है कि विश्व में सोने की सप्लाई लगभग 170,000 टन के आसपास है. साउथ अफ्रीका सोना उत्पादक टॉप 10 देशों के क्रम में अब तक पहले स्थान पर था, लेकिन अब इस पोजिशन को बरकरार रखने में ये देश पिछड़ता जा रहा है. चाइना और रसिया ने उसकी इस पोजिशन में एक तरह से सेंध लगा दी है. मैक्सिको, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान में भी सोना खनन हो रहा है. मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका, यूनाईटेड स्टेट्स, ऑस्ट्रेलिया और चाईना में इसका भंडार है.

भारत और सोना

भारत में सोने में निवेश करने की परंपरा पुरानी है. भारतीय इतिहास में सोने के मौद्रिक प्रयोग के साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा में भी उपयोग के कई उदाहरण मौजूद हैं. आज भी भारतीय जनमानस के बीच सोने में निवेश लोकप्रिय है. भारतीय निवेशक गोल्ड बार, गोल्ड क्वाइन और आभूषण के तौर पर निवेश के साथ ही इसकी इंट्राडे ट्रेडिंग में भी सक्रिय हैं. भारत में गोल्ड की ट्रेडिंग करने वाला एक बड़ा वर्ग है, जो कि ग्लोबल मार्केट को प्रभावित करता है.

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ग्लोबल डिमांड

दुनियाभर में सोने की तरलता और मानक के रूप में एकरूपता होने के कारण गोल्ड की ग्लोबली डिमांड है. भारत में सोने में निवेश करने की परंपरा पीढ़ियों से देखी गई है. वहीं विदेशी भी सोने की चमक के दीवाने हैं. ज्वेलरी, बॉन्ड, क्वाईन से लेकर गोल्ड बार आदि में निवेशकों की रुचि होने से सोना ग्लोबली डिमांड में रहता है.

यहां खास मांग

ज्वेलरी, घड़ी, कान के बूंदे, नेकलेस और अन्य आभूषणों के कारोबार में सोने की चमक सालों से मौजूद है. सदियों से सर्राफा जगत में सोने की मांग बरकरार है. इसी तरह बिजली का सुचालक होने और चमक फीकी न होने के भौतिक गुण के कारण कई इंडस्ट्रीज़ अपने उत्पाद निर्माण में सोने का उपयोग करती हैं. कनेक्टर्स, स्विच के अलावा सेल फोन में भी सोने का उपयोग किया जा रहा है.

इंडस्ट्रियल डिमांड

सोने की कीमत को ज्वेलरी कारोबार के साथ ही इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड भी प्रभावित करती है. ज्वेलरी के लिए भारत एक बड़ा बाजार माना जाता है. दंत चिकित्सा क्षेत्र में गोल्ड की बेहतर डिमांड है, साथ ही इसकी थर्मल, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी की क्षमता के साथ ही अन्य भौतिक विशेषताओं के कारण भी सोने का बाजार भाव तय होता है.

मुख्य कंज्यूमर्स देश

सोने के मुख्य कंज्यूमर्स में भारत का नाम सबसे ऊपर देखा जाता है. इसी तरह चाइना में भी गोल्ड की मांग में तेजी आई है. यूनाइटेड स्टेट्स के अलावा खाड़ी के देशों में भी गोल्ड चमक बिखेर रहा है. यहां मांग कम होने का असर सीधे तौर पर सोने के अंतर राष्ट्रीय बाजार पर देखा जाता है.

आपूर्ति-कीमत संबंध

राजनीतिक, पर्यावरणीय और श्रम संबंधी मुद्दों के चलते भी गोल्ड की कीमतों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.साथ ही भूगर्भीय या आकाशीय आपदा से भी आपूर्ति प्रभावित होने से कीमत में घट-बढ़ हो सकती है. युद्ध, आक्रमण और राष्ट्रीय आपातकाल भी सोने की कीमत प्रभावित करता है.गोल्ड के मुख्य उत्पादक देशों में युद्ध, आक्रमण और राष्ट्रीय आपातकाल की स्थितियां भी सोने के भाव को नियंत्रित करती हैं. इन देशों में बाजार का चलन भी सोने के दाम को प्रभावित कर सकता है.

विकल्प का खतरा

वस्तु के विकल्प से जुड़े अर्थशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार,‘विकल्प’ किसी वस्तु पर विनियोग करने में खतरा पैदा करता है.गोल्ड भी इससे जुदा नहीं, इसकी कीमत बढ़ने पर इसके खरीदार सस्ते विकल्पों जैसे चांदी आदि का सहारा लेते हैं. जिससे गोल्ड में असुरक्षित निवेश से निवेशक के लाभ या निवेश की गई राशि के नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है.

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गोल्ड टिप्स

क्यों करें गोल्ड की ट्रेडिंग?

जहां गोल्ड की ट्रेडिंग में खतरा है वहीं इसकीट्रेडिंग में लाभ की भी असीम संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता. ऐसे कई कारण हैं जिसकी वजह से प्रीसियस मेटल गोल्ड की ट्रेडिंग पर ट्रेडर्स का अधिक रुझान रहता है.अंतर राष्ट्रीय कीमत, ग्लोबल मार्केट के साथ ही निवेश में कम खतरा होने के कारण गोल्ड आज भी इन्वेस्टर्स के लिए निवेश का पहला विकल्प बना हुआ है. इसकी इंट्रा डे ट्रेडिंग से ट्रेडर्स बेहतर लाभ कमा रहे हैं.

गोल्ड (सोना) और इन्वेस्टमेंट

दूसरी कीमती धातुओं में से गोल्ड में निवेश करना सबसे ज्यादा चलन में है. अपने इन्वेस्टमेंट में रिस्क से बचने के लिए इन्वेस्टर्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट्स और डेरिवेटिव्स के जरिए सोना खरीदते हैं. हालांकि सोना बाजार भी अन्य बाजारों की तरह ही अटकल और अस्थिरता के अधीन होता है. अन्य कीमती धातुओं में तुलनात्मक रूप से सोना (गोल्ड) विनियोग के रूप में सर्वाधिक सुरक्षित तो है ही, साथ ही दुनिया के कई देशों में इसकी हेजिंग के भी अवसर मौजूद हैं. इंट्रा डे पर गोल्ड की ट्रेडिंग का चलन फिलहाल जोरों पर है.

मांग और पूर्ति पर नजर

तेजी से घटते भंडार क्षेत्र और निरंतर बदल रहीं भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण गोल्ड की मांग और पूर्ति पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में मांग और पूर्ति की परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद गोल्ड में अल्प कालिकतौर पर निवेश करना लाभप्रद कहा जा सकता है.

  • कीमत और आपूर्ति– सोने की कीमतें उसकी आपूर्ति को सदा से प्रभावित करती रही हैं. सोने की कीमत बढ़ने पर जहां खदानों से उसकी आपूर्ति बढ़ जाती है, वहीं इसकी कीमत घटने पर आपूर्ति भी कम हो जाती है.
  • सेंट्रल बैंक्स– सेंट्रल बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड भी सोने की कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. वर्ष 2004 के अंत में सेंट्रल बैंक और अधिकृत संगठन के पास 19 फीसदी सोना रिजर्व था. यूरोपियन सेंट्रल बैंक्स जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विस नेशनल बैंक को गोल्ड का की-सेलर कहा जा सकता है.
  • ब्याज दर-सामान्य तौर पर ये भी प्रचलित है कि सोने पर लगने वाली ब्याज दर से भी सोने के दाम तय होते हैं. ब्याज दर बढ़ने और घटने पर सोने के दाम भी बढ़ते और घटते हैं. सोने की कीमत को सेंट्रल बैंक्स की इंटरेस्ट रेट पर तय की गई मॉनेटरी पॉलिसी डिसीजन से भी जोड़ा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर बाजार से मुद्रा स्फीति के संकेत मिलने पर सेंट्रल बैंक इंटरेस्ट रेट को बढ़ाने का निर्णय ले सकता है, ऐसा होने पर सोने का भाव कम हो सकता है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं देखा गया है. साल 2011 में यूरोपिअन सेंट्रल बैंक के इन्टरेस्ट रेट को आंशिक रूप से घटाने पर सोने की कीमत में उछाल देखने को मिला था। इसी तरह भारत में भी साल 2011 के दौरान जब इंटरेस्ट रेट ऊंचाई पर था तब सोने की कीमत भी ऊंचाई पर देखने को मिलीं थीं.
  • अन्य कारक– सोने की कीमत को अन्य व्यापक आर्थिक घटक भी प्रभावित करते हैं. तेल की कीमत, करेंसी एक्सचेंज रेट और इक्विटी मार्केट के रिटर्न से भी सोने की कीमत का भविष्य तय होता है.
  • माइनिंग कंपनी-बजाए सोने को खरीदने के निवेशक उन कंपनी को भी खरीद सकते हैं जो गोल्ड माइनिंग कंपनी में शेयर के रूप में गोल्ड को प्रोड्यूस करती हैं. सोने की उच्च कीमत होने पर गोल्ड माइनिंग कंपनी के लाभ में भी उछाल आता है, जिसका लाभ अप्रत्यक्ष रूप से इसके शेयर्स पर पड़ता है, और इसमें निवेश करने वाला भी लाभ की स्थिति में रहता है. हालांकि ऐसा कुछ मामलों में नहीं भी होता. कई बार देखा गया है कि सोने के दाम में उछाल आने के बाद भी शेयर्स की कीमतें इससे अछूती रहीं.
  • अन्य कारक-सोने की माइन्स कमर्शियल इंटरप्राइज़ होती हैं. प्राकृतिक आपदा, संरचना के साथ मैनेजमेंट की विफलता, दुष्प्रचार, प्रतिकूल-अनुकूल राष्ट्रीय नीतियां, चोरी और भ्रष्टाचार से भी शेयर्स की कीमत और आपूर्ति पर असर पड़ता देखा गया है.

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गोल्ड में निवेश के प्रचलित तरीके

  • गोल्ड बार– निवेशक गोल्ड बार में भी निवेश करना सुरक्षित समझते हैं. लेकिन अलग-अलग ब्रांड्स की मानक बाजार में कीमत भी अलग-अलग होती है. साथ ही खरीदे गए गोल्ड बार का दाम बेचने के वक्त अलग भी हो सकता है.
  • क्वाइन– गोल्ड क्वाइन भी सोने में निवेश करने का पुराना तरीका है. बुलियन क्वाइन की कीमत उसके फाइन वेट और मांग और पूर्ति के स्माल प्रीमियम पर भी निर्भर करती है. इनकी शुद्धता की परख में बरती गई लापरवाही निवेशक के लाभ को प्रभावित करती है. सोने की परत चढ़े नकली गोल्ड क्वाइन से भी निवेशक को हानि हो सकती है.
  • गोल्ड राउंड– गोल्ड राउंड एक तरह से गोल्ड क्वाइन की ही तरह होते हैं, लेकिन इनकी करेंसी वैल्यू नहीं होती. जबकि गोल्ड क्वाइन के मुकाबले इसकी कीमत भी कम होती है.
  • सर्टिफिकेट-गोल्ड सर्टिफिकेट गोल्ड इन्वेस्टर्स की इन्वेस्टमेंट रिस्क और हस्तांतरण और इसके रखरखाव की लागत से जुड़ी स्थितियों का प्रमाणन करता है. आबंटित और अनाबंटित किए गए सोने पर बैंक गोल्ड सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं.
  • अकाउंट– सोने में निवेश से जुड़े कई खाते प्रचलन में हैं. कई बैंक में बैंक-खातों के फ्रेक्श्नल रिज़र्व बेसिस पर सोने के क्रय-विक्रय का ऑफर दिया जाता है. इसी तरह पूल एकाउंट्स भी चलन में हैं।
  • डेरिवेटिव्स और CFDs– वर्तमान में विश्व के कई एक्सचेंज और ओवर द काउंटर्स (OTC) में डेरिवेटिव्स (जैसे- गोल्ड फॉर्वर्ड्स, फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स) ट्रेड किए जा रहे हैं. यूएस में गोल्ड फ्यूचर्स को न्यूयॉर्क कमोडिटीज़ एक्सचेंज (COMEX) और यूरोनेक्स्ट.लिफे पर ट्रेड किया जा रहा है. जबकि भारत में गोल्ड फ्यूचर्स की नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर ट्रेडिंग होती है.
  • गोल्ड ज्वेलरी रीसाइक्लिंग– हाल ही के सालों में गोल्ड ज्वेलरी की रीसाइक्लिंग का कारोबार अरबों डॉलर इंडस्ट्री के कारोबार में तब्दील हो चुका है. इसमें कैश फॉर गोल्ड टर्म के जरिए सोने की टूटी या पुरानी ज्वेलरी की ऑनलाइन बिक्री की जाती है.

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