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कॉपर में कैसे करें ट्रेडिंग ?

  • जानें कि कॉपर का व्यापार कैसे करें?
  • क्या कॉपर की कीमत बढ़ जाती है?
  • क्या मुझे कॉपर की ट्रेडिंग करना चाहिए?
  • कॉपर के बारे में क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कॉपर में कैसे करें ट्रेडिंग

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तांबा (कॉपर)

कॉपर मेटल धरती पर खोजी गईं धातुओं में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वालेमेटल्स में से एक है।धारणा के मुताबिक इस चमकदार, लाल-नारंगी धातु को मानव ने हजारों साल पहले चलन में लाया। आधुनिक समाज में, तांबा रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसकी भौतिक प्रकृति सोना-चांदी की तरह ही है. इसकी प्रकृति इसे बिजली के तारों, छत और औद्योगिक मशीनरी सहित कई औद्योगिक उपयोगों के लिए इसे पूरी तरह उपयुक्त बनाती है। कॉपर मूल रूप से बहुत नरम, लचीला होने के साथ ही ऊष्मा और ऊर्जा का सुचालक है। हालांकि कीमती धातुओं सोना-चांदी की तरह कॉपर को मुद्रा के रूप में व्यापक तौर पर चलन में नहीं देखा जाता है.

कहां मिलता है

तांबे की वैश्विक आपूर्ति मुख्य रूप से भूमिगत खदानों से होती है. भूमिगत या खुली खदानों के अयस्क से कॉपर की पूर्ति होती है। सफल कॉपर माइनिंग के लिए कॉन्सन्ट्रेडेट कॉपर की की जरूरत होती है। जिसके बाद अपशिष्ट पदार्थ अलग कर अयस्क को गलाकर शुद्ध तांबा प्राप्त कर लिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक वार्षिक तांबा खनन आम तौर पर 1 9 लाख टन से अधिक है।

भारत और तांबा

ताम्र या तांबा (अंग्रेज़ी:Copper) मुक्त व संयुक्त दोनों अवस्थाओं में मिलता है। संयुक्त अवस्था में यह अपने अयस्कों के रूप में पाया जाता है। ताम्र के अयस्क मुख्य रूप से सिंहभूम, सिक्किम, उड़ीसा, नेपाल, भूटान में पाये जाते हैं। कॉपर पायराइट, कॉपर ग्लास, क्यूप्राइट, मैकालाइट आदि इसके प्रमुख अयस्क हैं। ताम्र, गुलाबी, लाल रंग की चमकदार धातु है व चांदी के अतिरिक्त विद्युत की सबसे अच्छी सुचालक भी. विद्युत सुचालक होने के कारण इसका विद्युत यंत्र कैलोरीमीटर बनाने में यूज किया जाता है। भारत में ताँबे का प्रयोग काफ़ी लम्बे समय से किया जाता रहा है। वैदिक काल में इसका पहली बार प्रयोग किया गया था।

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भारत की प्रसिद्ध खनिज खदानें

भारत में तांबे की प्राप्ति आग्नेय, अवसादी एवं कायन्तरित तीनों प्रकार की चट्टानों से होती है.जिसमें कई प्रकार के पदार्थ मिले रहते हैं। इसके प्रमुख खनिज सल्फाइड, ऑक्साइड तथा कार्बोनेट हैं. लाल एवं भूरे रंग का खनिज ताँबा अत्यधिक तन्य एवं विद्युत का उत्तम सुचालक होने के कारण विद्युत कार्यों में अधिक उपयोग में लाया जाता है. हालांकि भारत में मिलने वाली ताँबा खनिज की चट्टानों से शुद्ध धातु का अंश मात्र 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक ही मिल पाता है. भारत में योग्य तांबे का भंडार 41.68 करोड़ टन माना गया है. इसमें 43 लाख 70 हज़ार टन धातु उपलब्ध है. संभावित संसाधनों के रूप में 76 करोड़ 99 लाख टन तांबा अयस्क का भंडार है.

  • देश में झारखण्ड, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में ताँबा मिल रहा है. जबकि कुछ मात्रा में इसकी प्राप्ति कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सेभी होती है.
  • झारखण्ड का सिंहभूम ताँबा उत्खनन की दृष्टि से सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है. यहां से उड़ीसा राज्य तक लगभग 140 किमी लम्बी पट्टी में तांबा खनिज मिलता है. इस क्षेत्र में मोसाबानी, राखा, पाथरगोड़ा, सुरदा, कैंडादीह, धोवानी, हसातु, बारमजादा, जाराडीह में इस धातु की प्रमुख खदानें हैं. वहीं राजस्थान का खेतड़ी ताँबा क्षेत्र सिन्धु घाटी सभ्यता काल से ही तांबा उत्खनन का केंद्र है. यहां कोलीहान, खेतड़ी, मंडल और कुधान खदान से तांबे की प्राप्ति होती है.
  • देश में इसके अलावा आन्ध्र प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तांबा निकाला जाता है. देश में खनन किया जा रहा तांबा देश की जरूरत के मान से काफी कम है.अतः इसकी पूर्ति के लिए भारत को संयुक्त राज्य अमरीका, कनाडा, जापान और जाम्बिया से इसका आयात करना पड़ता है.

मुख्य उत्पादक

दक्षिण अमेरिका में तांबे की सबसे ज्यादा खदानें हैं, और चीन परिष्कृत तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक स्रोत है। कॉपर दुनिया भर के देशों में खनन किया जाता है. ऑस्ट्रेलिया कनाडा चिली, चीन, कांगो मेक्सिको, पेरू, रूस, ज़ाम्बिया पुराने स्क्रैप को रिफाइन करने का बड़ा केंद्र हैं. वैश्विक तौर पर दस फीसदी से ज्यादा और यूएस को लगभग 30 फीसदी से अधिक की आपूर्ती का ये देश बड़ा केंद्र हैं।

ग्लोबल डिमांड- बीते कुछ सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रसार के साथ ही तांबे का भी चलन तेजी से बढ़ रहा है। डेवलपिंग कंट्रीज़ में इन्फ्रा स्ट्रक्चर के निर्माण के लिए कॉपर की भी मांग बढ़ गई है।

मुख्य कंज्यूमर्स- मुख्य तौर पर कॉपर  के मुख्य कंज्यूमर्स के तौर पर चाइना, रसिया, यूरोपीय यूनियन, यूनाइटेड स्टेट्स और जापान का नाम लिया जाता है। इनमें से चाइना, रसिया और ईस्टर्न यूरोप ने इसकी बड़ी मांग का अनुभव किया है. साथ ही इन देशों में भविष्य में भी इसकी बड़ी मांग की संभावना जताई जा रही है।

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कॉपर में ट्रेडिंग

इन इंडस्ट्रीज़ में मांग – बड़े तौर पर इन इंडस्ट्रीज़ में मांग का जोर है

बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन– इलेक्ट्रिकल वायरिंग, प्लंबिंग और मकानों की वैदर प्रूफिंग के साथ ही कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण में भी इसकी खासी मांग है।

परिवहन उपकरण– कॉपर की उत्कृष्ट चालकता के कारण यह इलेक्ट्रिक मोटर्स में इसे खास बनाता है.

इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रिक प्रॉडक्ट्स– इंटीग्रेटेड सर्किट और प्रिंटिंग सर्किट बोर्ड में कॉपर का उपयोग उसकी सुचालकता के गुण के कारण सबसे ज्यादा किया जाता है. कॉपर का उपयोग इलेक्ट्रोमैग्नेट्स, वैक्यूम ट्यूब, कैथोड रे ट्यूब्स और माइक्रोवेव उपकरणों में तेजी से बढ़ा है.

कंज्यूमर और जनरल उत्पाद– कॉपर की मजबूत एंटी माइक्रोबाइल प्रॉपर्टीज़ और अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी से पंजीकरण की बाध्यता के कारण इसकी आधुनिक परिवेश में खास डिमांड है.

कीमत और बाजार– इसकी कीमत वैश्वक अर्थव्यवस्था की समग्र ताकत के लिए एक अच्छा बैरोमीटर है. सामान्य तौर पर इन्हें इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • इमर्जिंग मार्केट्स– किसी वस्तु की मांग में इन्फ्रास्ट्रक्टर का अहम योगदान होता है. इमर्जिंग मार्केट कॉपर की कीमत के मामले में एक तरीके से की-ड्राइवर की भूमिका निभाती है। भारत और चाइना जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश अपनी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों में लगा रहे हैं.आश्चर्य की बात नहीं, वैश्विक तांबे की बढ़ती मांग में एशिया भी अब बड़ी भूमिका में है. तांबे की कीमतें इन देशों के आर्थिक विकास के साथ ही ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओँ के विकास पर भी निर्भर हैं। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में विकास मंदी का निश्चित रूप से तांबे की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • यूएस हाउसिंग मार्केट– यूएस होम बिल्डिंग इंडस्ट्री बिजली के तारों, छत, नल फिटिंग और अन्य चीजों के बीच इन्सुलेशन में तांबे का उपयोग करती है। इसलिए, तांबे की मांग को निर्धारित करने में यूएस हाउसिंग डिमांड, मॉर्टगेज रेट, यूएस ग्रास डॉमेस्टिक प्रॉडक्ट और राजनैतिक असंतुलन भी तांबे की वैश्विक मांग और कीमत को प्रभावित करते हैं.संयुक्त राज्य अमेरिका में भवन निर्माण उद्योग में तांबे के कुल उपयोग का लगभग आधा हिस्सा शामिल है। भविष्य में तांबा की कीमतों के बारे में सुराग लगाने के लिए निवेशकों को इस बाजार के रुझानों पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।
  • आपूर्ति व्यवधान– राजनीतिक, पर्यावरणीय और श्रम संबंधी मुद्दों के चलते भी तांबे की कीमतों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही भूगर्भीय या आकाशीय आपदा से भी आपूर्ति प्रभावित होने से कीमत में घट-बढ़ हो सकती है।
  • विकल्प का खतरा-वस्तु के विकल्प से जुड़े अर्थशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार,‘विकल्प’ किसी वस्तु पर विनियोग करने में खतरा पैदा करता है। कॉपर भी इससे जुदा नहीं, इसकी कीमत बढ़ने पर इसके खरीदार सस्ते विकल्पों जैसे एल्युमिनियम, निकल, लेड और आयरन धातु का सहारा लेते हैं। जिससे कॉपर में असुरक्षित निवेश से निवेशक के लाभ या निवेश की गई राशि के नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है.

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क्यों करें कॉपर की ट्रेडिंग?

जहां कॉपर की ट्रेडिंग में खतरा है वहीं इसके कारोबार में लाभ की भी असीम संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता. कुछ ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से कॉपर मेटल की ट्रेडिंग पर कारोबारियों का अधिक रुझान रहता है.

इंडस्ट्रियल ग्रोथ– कॉपर के कई इंडस्ट्रियल यूज़ होने के कारण इसके बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना मुनासिब नहीं. आर्थिक विकास के कारणों के आधार पर भी इसकी बढ़ती मांग को नकारा नहीं जा सकता. तेजी से बढ़ते आफ्रीकन कॉन्टीनेंट, ईस्टर्न यूरोप और आधुनिक होते एशिया में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से निवेश किया जा रहा है। यहां कॉपर की मांग बढ़ने से कॉपर में निवेश करना सुरक्षित कहा जा सकता है।

मांग और पूर्ति पर नजर– तेजी से घटते खनन क्षेत्र और निरंतर बदल रहीं भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कॉपर की मांग और पूर्ति पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में मांग और पूर्ति की परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद कॉपर में दीर्घकालिक तौर पर निवेश करना लाभप्रद कहा जा सकता है.

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कॉपर में ट्रेडिंग : सवाल आपके जवाब हमारे

कैसे करें कॉपर में ऑनलाइन ट्रेडिंग

क्या मुझे कॉपर का ट्रेडिंग करना चाहिए?

सभी निवेशों में जोखिम और लाभ की स्थिति होती हैइसलिएट्रेडर्स को निर्णय लेने से पहले इसकी जांच करना चाहिए। तांबे के मामले मेंट्रेडर्स अपने पोर्टफोलियो के समग्र जोखिम को कम करने के लिए धातु को खरीदने के लिए विचार कर सकते हैं। अधिकांश ट्रेडर्स के शेयर्स और बांडों में आवंटित अपनी परिसंपत्तियों पर अलग-अलग मत है. तांबे में ट्रेडिंग,परिसंपत्ति वर्ग कोविविधीकरण प्रदान करता है, जो एक पोर्टफोलियो की समग्र अस्थिरता को कम करने का प्रभावी तरीका हो सकता है.

ग्लोबल अपॉर्च्युनिटि– ग्लोबल इकोनॉमी में इन्वेस्ट करने के लिए कॉपर बड़ा चांस देता है. खास तौर पर इमर्जिंग और डेवलपिंग सेक्टर्स, जहां पर इन्फ्रास्ट्रक्चर की बड़ी मांग है। इन सेक्टर्स में कॉपर में ट्रेडिंग करने का सुनहरा अवसर है. हालांकि कॉपर की ग्लोबल ट्रेडिंग में रिस्क भी है क्योंकि अंतर राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गिरावट होने का सीधा असर कॉपर बाजार पर भी पड़ता है, जिससे कॉपर से मिलने वाला लाभ बाद में हानि में भी तब्दील हो सकता है.

कॉपर में ट्रेडिंग के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

अधिकांश ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स इस बात पर सहमत हैं कि कॉपर की कीमतें चाईना की इकोनॉमी पर निर्भर हैं। उनका मानना है चाइना में बढ़ती कॉपर की डिमांड इसकी अंतर-राष्ट्रीय बाजार में कीमतें निर्धारित करने में दीर्घकालिक तौर पर बड़ी भूमिका तय करेगी।

मूल्य निर्धारक – कॉपर की कीमतें कई चीजों से प्रभावित हो सकती हैं, मूल रूप से:

  • यूएस डॉलर की ताकत
  • ऑयल कीमतें (कॉपर के शोधन प्रक्रिया में अहम)
  • चीन से सहायक मांग
  • निकास की लागत
  • अप्रत्याशित घटनाएं (जैसे- श्रमिक हड़ताल, भूकंप, भौगोलिक-राजनैतिक असंतुलन)

कीमतों में उतार-चढ़ाव के खिलाफ अपनी पूंजी को लीवरेज देने के लिए निवेशक आम तौर परकॉपरफ्यूचर्स मार्केट का उपयोग करते हैं.एक तांबा फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट 1 मीट्रिक टन कॉपर को रिप्रज़ेंट करता है. इसकी स्टेंडर्ड ट्रेडिंग के लिए सोमवार से शुक्रवार तक इसके सुबह 10 बजे खुलने से लेकर रात 11.30 बजे तक का वक्त निर्धारित है. केंद्रीय स्टेंडर्ड टाइम के अनुसार साढ़े 13 घंटों की ट्रेडिंग का प्लटफार्म बनाया गया है. पिछले दिन का परिणाम जारी करने के लिए ब्रेक भी तय किया गया है. कॉपर फ्यूचर्स में ट्रेडिंग करने के लिए मार्केट में आ रहे उतार-चढ़ाव के साथ ही विकासशील बाजार क्षेत्र पर सक्रिय नजर रखना जरूरी है. क्योंकि तांबे के बाजार में तेज उतार-चढ़ाव आता रहता है. एक छोटी सी अवधि में नजर अंदाज की गई बाजार की स्थिति निवेशक के लिए फायदे के बजाए नुकसानदायक हो सकती है.

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इन एक्सचेंज में कॉपर का फ्यूचर

कमोडिटि एक्सचेंज (कॉमेक्स)– कॉमेक्स शिकागो मर्केंन्टाइल एक्सचेंज का सदस्य है। कॉमेक्स को इंडस्ट्रियल मेटल्स के मामले में बड़े स्तर पर दक्षता हासिल है. ये एक्सचेंज कॉपर फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट्स के एक और संस्करण (वर्जन) की भी सुविधा दे रहा है. इस वर्जन में कॉपर की दर 12,500 पाउंड है. इस एक्सचेंज में कीमतें ट्रेडिंग अवधि के दौरान निरंतर अपडेट होती हैं. मार्केट ट्रेडिंग से जुड़े आंकड़े भी समय-समय पर जारी करता है, जिससे ट्रेडर्स को ट्रेडिंग की प्लानिंग बनाने में काफी आसानी मिलती है.

लंदन मेटल एक्सचेंज (LME)– कॉपर मेटल की ग्लोबल ट्रेडिंग के लिए लंदन मेटल एक्सचेंज एक बड़ा प्लेटफार्म है. ये एक्सचेंज इसलिए अहम है क्योंकि कॉपर के उपभोग करने वाले देश इससे जुड़े हैं. यूएस, चिली, पेरु, और चाइना कॉपर के बड़े बाजार हैं. कॉपर फ्यूचर्स की ट्रेडिंग के लिए आज ये दूसरा सबसे पसंदीदा एक्सचेंज माना जाता है.

मल्टी-कमोडिटि एक्सचेंज (MCX)-इस एक्सचेंज से इन्वेस्टर्स को स्टेंडर्ड और मिनि फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट्स की ट्रेडिंग का मौका मिलता है. MCX में फरवरी, अप्रैल, जून, अगस्त और नवंबर में स्टेंडर्ड कॉन्ट्रेक्ट्स जारी होते हैं. भारतीय कारोबार आधारित इस एक्सचेंज में 1MT और 250 किलोग्राम के मिनि फॉर्मेट में ट्रेड होता है.

कैसे करें कॉपर में ऑनलाइन ट्रेडिंग

कॉपर वायदा कारोबार करने के लिए एक लोकप्रिय प्लेटफार्म ऑनलाइन ट्रेडिंग भी है। ज्यादातर ब्रोकरेज शेयरों और स्टॉक विकल्पों में व्यापार करते हैं। हालांकि, कई ने अब ऑनलाइन ट्रेडिंग करना शुरू कर दिया है. नतीजतन, कई अनुभवी व्यापारियों के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग कमाई का जरिया भी बन गया है। ये अपने अनुभव के आधार पर ट्रेड करने वालों को बगैर रिस्क के ट्रेडिंग करने के विकल्प सुझाते हैं और बदले में परामर्श राशि वसूलते हैं।

ध्यान रखेंकिसी भी निवेश में रिस्क होती है, साथ ही लाभ की भी गारंटी नहीं. ऐसे में कॉपर कमोडिटि में ट्रेडिंग से पहले कॉपर मार्केट के सहयोगी कारकों के साथ ही उसके कंज्यूमर्स की पड़ताल कर लें. साथ ही बाजार की चाल पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है. कॉपर बाजार को नियंत्रित करने वाले कारकों पर रखी गई पैनी नजर से इन्वेस्टर खुद को बेहतर पोजिशन में बरकरार रख सकता है. अनुभवी ट्रेडर्स की राय भी लाभ की गारंटी में कारगर भूमिका अदा कर सकती है.

हम कर सकते हैं आपकी मदद

लंबे समय से अपने कस्टमर्स को लो रिस्क ट्रेडिंग के टिप्स दे रही हमारी कंपनी IGS (commodityonlinetips.in) आपको बेहतर विकल्प सुझा सकती है। बेस मेटल ट्रेडिंग के बारे में हमारी कंपनी के टेक्निकल और फंडामेंटल एनलिस्ट्स के पास है मार्केट से जुड़े हर छोटे-बड़े बदलावों की पूरी जानकारी. अपने अनुभव से हम कर सकते हैं इन्वेस्टमेंट में आपकी रिस्क को बहुत कम. तो जुड़ें हमसे Commodityonlinetips.in पर और पाएं मिनिमम रिस्क पर मैक्सिमम प्रॉफिट.

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